इस पत्ती का अर्क इन सबकी है कुंजी कान दर्द ,बहरापन ,या हो कान की फुंशी

1 हल्की सिंकाई करने की कोशिश करें:

इसे कई तरीकों से किया जा सकता है। गर्मी दर्द को सुन्न कर सकती है। लेकिन इतनी सावधानी बरतें कि आप अपने को जला ना लें।!
अपने कान से लगभग दस इंच दूर ब्लो ड्रायर हल्के तापमान पर चलायें। ताप परिवर्तन से आपके कान में का द्रव आसानी से इधर-उधर जा सकता है।
एक तौलिये को गुनगुने पानी में भिगोयें, निचोड़ें और कान पर 20 मिनट तक दबा कर रखें। यदि दर्द वापस आता है तो इस क्रिया को दुहरायें।
आसान और लगातार गर्मी के झोंके पाने के लिये हीटिंग पैड को कान पर सटाने वाला पुराना तरीका अपनाएं।

2 ऑलिव या बेबी ऑइल का प्रयोग करें:

हालाँकि ये सुनने में अजीब लग सकता है परन्तु ऑलिव या बेबी ऑइल; इयर-ड्रॉप्स का एक बेहतर विकल्प हो सकते है। ये चिकनाहट लाते हैं और आपके दर्द में आराम पहुंचा सकते हैं।
इसे हल्का गरम कर लें (तेज़ गरम नहीं) और इसकी 3 या 4 बूँदें उस कान के छेद में डालें जिसमे दर्द हो रहा हो। लगभग आधे घंटे तक इसे अवशोषित होने दें और इसके बाद आप लेट जाएँ ताकि यह बहकर बाहर आ जाये। इससे दर्द तुरंत कम हो जाना चाहिए।
यदि उपलब्ध हो तो इसमें दालचीनी मिलाएं। स्पष्टतः, लहसुन का तेल भी इसमें कारगर होता है।

3 लहसुन का प्रयोग कीजिये:

सदियों से लोगों का मानना कई कि लहसुन, कान दर्द में फायदा करता है। आप के पास ये किसी भी रूप में हो, इसका प्रयोग करने पर विचार करें। कुछ स्थापित तरीके यहाँ दिए गये हैं:
लहसुन के रस की कुछ बूँदें उस कान में डालें जो दर्द कर रहा हो।
लहसुन की एक कली को तिल के तेल के साथ हल्का गरम करें। जब लहसुन तेल में मिश्रित हो जाए तो तेल को अपने कान में डालें।

4 लहसुन की एक कली को दो भागों में तोड़ लें, एक भाग अपने कान में डालें तथा दूसरा भाग एक कप खौलते हुए पानी में डालें। अपने कान को इस ढंग से कप के ऊपर ले जाएँ कि कप से निकलने वाली लह्सनी भाप दर्द कर रहे कान में जा सके।

5 अपने फ्रिज में बचे हुए प्याज का भी उपयोग करें:

ये एक अन्य सब्जी है जो छुटकारा दिलाती है। प्याज को काटें, पीसें और एक पतले साफ़ कपड़े में कस कर पोटली बना लें। पोटली को कान पर रखें और करवट लेट जाएँ।
यदि आपके पास प्याज न होकर अदरक हो तो उसके साथ भी यही क्रिया करें—वही सिद्धांत लागू होते हैं।
तुलसी या पेपरमिंट का प्रयोग करें: ये वास्तविक जड़ी-बूटी वाला उपचार है। दोनों के लिये आपको रस निकालने की आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रक्रिया में उन्हें पीसना और हल्का गरम करना शामिल होता है। पेपरमिंट के तेल को कान के चारो ओर लगाना चाहिए जबकि तुलसी के रस को कान के अन्दर डाला जा सकता है।

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